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ध्यान प्रबोध

14 February

ध्यान प्रबोध —

परमात्मा का अस्तित्व है परमात्मा ने ही आपको इस पथ पर बुलाया है इस यात्रा के आदि से अन्त तक सर्वदा परमात्मा पथ प्रर्दशक के रूप में (प्रदर्शन) मौजूद रहेगा।
मैं किसी व्यक्ति से ‘‘विवेक शून्य श्रद्धा’’ की माँग नहीं करता। मैं बस माँगता हूँ कि मौलिक श्रद्धा जो धीर स्थित विवेक ज्ञान के द्वारा संरक्षित हो।

When we talk to God
It is Prayer
and
When God Talk to us
It is Meditation!

Meditation is a Liberation from the resistance of the mind, which is the Past Conditioning.

कई बार धारणा को ध्यान समझ लिखा जाता है परन्तु 12 सैकन्ड यदि मन एक विचार पर रहे तो वह धारणा है।
12 धारणाओं से 1 ध्यान बनता है। 12 ध्यान की समाधि होती है।
ध्यान के लिए श्रम करों। स्वामी सत्यानन्द कहते थे तीव्र कर्म करो जिससे देह मन की कलुषता समाप्त हो सके।
अन्तकरण में मन, बुद्धि की ज्ञान योग, चिन्त की ध्यान से और अंहकार की राजयोग से साधना करनी चाहिए।
ध्यान की पहले चरण मे शरीर की अतिरिक्त ऊर्जा हटाने के लिए उछले, कूदे, भागे, जिस भी पशु- जैसे बोली बोल सकते हो बोले।
कुछ देर शान्त रहे
फिर विपश्यना अभ्यास करे। विपश्यना का अर्थ है अन्दर देखना।

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