Archive | Yoga

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ध्यान धारणा के बिन्दू

14 February

धारणा के बिन्दू रंगीन मयूर पंख को मन सम्मुख रख कर या कल्पना करें एक मोर के बिन्दू और ध्यान को वही सुस्थिर कर दें। ध्यान करे की बासुँरी सम्मुख है और उससे मन्द स्वर फूट रहे है। अब संयुक्त ध्यान करे कि बाँसुरी पर मोर पंख बँधा है, तो मधुर ध्वनि भी है और [...]

हंस साधना

14 February

सिद्वों ने शुद्ध चैतन्य की उपमा हंस से दी है आध्यात्मिक उन्नति में शुद्ध प्रबुद्ध चेतना साधना से जैसे-जैसे निखरती है, साधक जीवन में अन्त्रमन की सरलता और सरसता को वैसे ही महसूस करता है। इसी कारण आध्यात्मिक उन्नति के शिखर पर बैठे सिद्व परमहंस कहलाते हे। हंस साधना सो हं – श्वास को भीतर [...]

साधना की पूर्व तैयारी Meditation

14 February

साधना की पूर्व तैयारी साधना कैसे स्थान पर धयान करें व कैसे वस्त्र पहनें, भोजन क्या करें, किन-किन का विशेष ध्यान रखे। ध्यान साधक को नियमित अभ्यास के लिए एक एकान्त कक्ष हो। जिसमें हल्के गुलाबी या हल्के नीले रंग का कक्ष हो। शोर गुल से दूर तथा प्रदूषण व विकिरण (त्ंकपंजपवद) फैलाने वाले इलैक्ट्राॅनिक [...]

ध्यान प्रबोध

14 February

ध्यान प्रबोध — परमात्मा का अस्तित्व है परमात्मा ने ही आपको इस पथ पर बुलाया है इस यात्रा के आदि से अन्त तक सर्वदा परमात्मा पथ प्रर्दशक के रूप में (प्रदर्शन) मौजूद रहेगा। मैं किसी व्यक्ति से ‘‘विवेक शून्य श्रद्धा’’ की माँग नहीं करता। मैं बस माँगता हूँ कि मौलिक श्रद्धा जो धीर स्थित विवेक [...]

ध्यान क्यों करें? कैसे करे? और कब करें?

14 February

आधुनिक समाज में व्यस्ततम् व्यक्ति ध्यान क्यों करें? कैसे करे? और कब करें? यही जानना चाहता है। ध्यान का उपयोग क्या हैं? क्या ध्यान विचार शून्यता को उपलब्ध कराता है या मात्र एक बौद्धिक को तूहल बन कर रह जाता है अथवा अशान्त मन को शान्त करने का उपाय मात्र है। यह जिज्ञासा प्रत्येक साधक के [...]

Ayurveda आयुर्वेद

09 September

आयुर्वेद Ayurveda शरीर, इन्द्रीय और आत्मा के संयोग का नाम आयु है। नित्य प्रति चलने से कभी भी एक क्षण न रूकने से इसे आयु कहते हैं। आयु का ज्ञान जिस विद्या से प्राप्त किया जाता है वह आयुर्वेद है। ज्ञान का प्रारम्भ सृष्टि से पूर्व हुआ यह सुश्रुत संहिता कहती है। अतः पहले आयुर्वेद [...]

हंस साधना

22 August

हंस साधना – – सो हं – श्वास को भीतर लेते समय सो का उच्चारण करें। श्वास को बाहर छोड़ते समय हं का उच्चारण करें। यह हंस साधना का तात्पय है, जो परमात्मा है, वह मैं हूँ। – मैं वही हूँ यह जगत मेरी कल्पना मात्र है। – यह अजपा जाप है। यह सिद्धों की [...]